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मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। तमाम कायदे कानून को ताक पर रखकर छजलैट थानाक्षेत्र के सलावा गांव में अन्यायी पंचायत खुद ही जज बन गई। सास से झगड़े जैसी मामूली बात को संगीन अपराध करार देते हुए पंचों की मति मारी गई। उनके तुगलकी फरमान के बाद दो बहुओं को पेड़ से बांधकर बीस-बीस कोड़ों की असहनीय सजा दी गई। दोनों अचेत हो गईं तो परिवार वाले उठाकर घर ले गए।
सास और बहुओं के बीच विवाद की खबरें आम बात हैं पर पंच परमेश्वर ने सलावा गांव में जो कुछ किया उसने तो कबीलाई बर्बरता की याद दिला दी।
गांव के एक परिवार में सास की दो बहुओं से नहीं बनी और आये दिन इसे लेकर कलह रहने लगी। मामला बढ़ता चला गया तो समाज के लोगों ने फैसले के लिए परिजनों की सहमति से पंचायत बुला ली। सरपंचों ने दोनों बहुओं और सास दोनों का पक्ष सुना। मेल मिलाप और मिलकर रहने की सलाह देने के बजाय पंच परमेश्वरों ने सभ्यता और मर्यादा का चोला उतार फेंका। पंचों ने आदेश दिया कि सास से झगडऩे वाली दोनों बहुओं को पेड़ से बांधकर बीस-बीस कोड़े मारे जाएं। तुगलकी फरमान पर तत्काल अमल हुआ। दोनों बहुएं रोती, गिड़गिड़ाती रहीं, लेकिन ग्रामीणों और परिवार वालों ने जबरदस्ती दोनों के हाथ नीम के पेड़ से बांध दिए। इसके बाद बीस-बीस कोड़े मारने का सिलसिला शुरू हो गया। हर कोड़े पर चीखती, बचाने की मिन्नतें करती रहीं। अगली बार गलती न करने की भी गुहार लगाई, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा।
कुछ सभ्य लोगों ने विरोध किया तो इनको सरपंचों का फैसला कहकर चुप करा दिया गया। कोड़ों की मार से दोनों बहुए अचेत हो गईं तो रस्सी से बंधे हाथ खोलकर परिजन घर ले गए। बिरादरी के पंच चन्ना, गोपाल, जय सिंह ने सीना ठोककर कहा कि हमारी बिरादरी में पंचों का जो फैसला होता है, उसके अनुसार ही दंड दिया जाता है। हमारे द्वारा बनाए कानून ही बिरादरी में चलते हैं और किसी कानून को हम नहीं मानते। थानाध्यक्ष छजलैट मुस्तकीम अली ने वहीं कहा जो पुलिस कहती आयी है कि इस तरह की घटना की जानकारी ही नहीं है।
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(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)
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