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Doctor wad of cotton left in the stomach of patient, hospital 10 lakh fine 12244170




डॉक्टर ने पेट में छोड़ा रुई का गुच्छा, अस्‍पताल पर 10 लाख जुर्माना


रायपुर(निप्र)। भिलाई सेक्टर-9 हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एक मरीज के पेट के ऑपरेशन में गंभीर लापरवाही करते हुए रुई का गुच्छा और कागज पेट में छोड़ दिया। डॉक्टरों की लापरवाही यहां तक ही नहीं थमी। मरीज को पेट दर्द होने के बाद भी उसे अस्पताल से छुट्टी कर दी।



जब पेट दर्द बंद नहीं हुआ तो मरीज दोबारा उसी अस्पताल में पहुंचा, लेकिन डॉक्टरों ने गंभीरता नहीं बरती, जिसके चलते मरीज मरणासन्ना अवस्था में पहुंच गया। तब मरीज एक दूसरे अस्पताल में गया, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उसके पेट से रुई और कागज को बाहर निकाला।



इलाज में लापरवाही के इस केस में उपभोक्ता आयोग ने जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश को सही ठहराया है। आयोग ने अपने फैसले में कहा है कि बीएसपी के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर इलाज में लापरवाही के लिए मरीज को 10 लाख रुपए देगा और ऑपरेशन के एवज में मरीज से लिया खर्च 81 हजार 751 रुपए भी लौटाएगा। आयोग ने मरीज को मानसिक कष्ट के लिए दस हजार रुपए भी बीएसपी को देने का आदेश दिया है।



क्या है मामला



निशांत कुमार सिंह सुपेला में कपड़े का व्यवसाय करता है। 24 फरवरी, 2012 को वह पेट दर्द की शिकायत लेकर भिलाई इस्पात संयंत्र के मुख्य अस्पताल पं.जवाहरलाल नेहरू अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर से-9 पहुंचा, जहां अपेंडिक्स की डायग्नोस कर भर्ती कर लिया गया। 25 फरवरी को डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन कर दिया। ऑपरेशन के बाद भी उसके पेट में दर्द होता रहा और मरीज ने इस बात की शिकायत डॉक्टर से की, लेकिन डॉक्टरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और 3 मार्च, 2012 को अस्पताल से छुट्टी कर दी।


दर्द जब ज्यादा बढ़ गया तो वह 22 अप्रैल को परिजन फिर उसे अस्पताल लाए। डॉक्टर दर्द निवारक दवा देते रहे, लेकिन दर्द दूर नहीं हुआ। 8 दिन बाद 30 अप्रैल को डॉक्टर ने जवाब दे दिया कि कहीं भी जाकर इलाज करवा लो। तब मरीज नेहरू नगर स्थित धनवंतरि अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती हुआ, जहां 11 मई को उसका ऑपरेशन किया गया। वहां के डॉक्टर ने मरीज के पेट में रुई का गुच्छा और नेपकीन देखा। रुई अतड़ियों में चिपककर भीतर घुस गई थी। इससे काफी दर्द हो रहा था।


डॉक्टरों ने की लापरवाही-आयोग


राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जस्टिज आरएस शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि चिकित्सकीय उपेक्षा के लिए बीएसपी और सेक्टर-9 अस्पताल के डॉक्टर जिम्मेदार हैं। जिला फोरम ने 26 मार्च 2014 को क्षतिपूर्ति राशि देने का जो आदेश दिया है, वह उचित है। इसलिए बीएसपी की अपील को निरस्त किया जाता है।



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Web Title:Doctor wad of cotton left in the stomach of patient, hospital 10 lakh fine


(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)





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