जानिए शादी से पहले कुंडली मिलाना क्यों जरूरी है?
वर्ण के अंक 01
वर्ण के अंक 01 होते है और यदि दोनों के वर्ण में समानता है तो वर-बधु की कार्यक्षमता अच्छी रहेगी जिससे विवाह के बाद दोनों का विकास होगा। वर्ण के अंक शून्य होने पर कार्यक्षमता अच्छी नहीं होती है।
संतान अच्छी
2- वश्य के अंक 02 होते है। वर-वधु की कुण्डली में वश्य के अच्छे अंक होने से दोनों से उत्पन्न होने वाली सन्तान सुन्दर, सुशील, अज्ञयाकारी और भाग्यशाली होगी। यदि वश्य के अंक शून्य है तो सन्तान होने में बाधायें आयेंगी या फिर दुष्ट प्रकुति की सन्तान उत्पन्न होगी।
3-तारा के अंक 04 होते है। लड़के-लड़की की कुण्डली में तारा के अंक अच्छे होने से विवाह के पश्चात दोनों के भाग्य में वृद्धि होगी। यदि तारा के अंक शून्य होगें तो शादी के बाद दोनों का भाग्य साथ न देगा जिस वजह से प्रगति में बाधायें आयेंगी।
मानसिक और सेक्स क्षमता
4-योनि के अंक 05 होते है। वर-वधु की कुण्डली में योनि के अंक बेहतर मिलने पर दोनों की मानसिक और सेक्स क्षमता अच्छी रहती है। यदि योनि के अंक शून्य है तो विवाह बाद दोनों की मानसिक स्तर न मिलने पर आये दिन तनाव होगा। सेक्स में असंतुष्टि के कारण भी झगड़ा होगा।
5-ग्रहमैत्री के 05 अंक होते है। लड़के-लड़की की कुण्डली में ग्रहमैत्री के अंक अच्छे मिलने से दोनों में सामंजस्य बेहतर रहता है एंव पारिवारिक उन्नति होती है। ग्रहमैत्री के अंक शून्य होने पर पारिवारिक प्रगति बाधित होती है एंव विरोधाभास बना रहता है।
सम्पत्ति में वृद्धि
6-गण के अंक 06 होते है। पुरूष-स्त्री की कुण्डली में जब गण के अंक बेहतर होते है तो दोनों का स्वभाव आपस में मेल खाता है तथा सम्पत्ति में वृद्धि होती है। गण के अंक शून्य होने पर बनी हुयी सम्पत्ति का भी नाश होने की आशंका रहती है।
7-भकूट के अंक 07 होते है। दोनों की कुण्डली में भकूट के अंक अच्छे मिलने पर आपस में अच्छा प्रेम बना रहता है और मेहनत के दम पर दिनों-दिन परिवार की प्रगति होती रहती है। भकूट के अंक शून्य होने पर वर-वधू एक-दूसरे को फूटी आॅखो नहीं देखना चाहते है। बस मजबूरी में रिश्ता निभाते रहते है।
जानिए शादी से पहले कुंडली मिलाना क्यों जरूरी है?
No comments
Post a Comment