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Foreign investors are looking at India's hopes : Jaitley - विदेशी निवेशक भारत की तरफ उम्मीद से देख रहे हैं : जेटली



पिछले साल सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने धीमी अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के कदम उठाने शुरू कर दिए थे। हालांकि रोजगार, निवेश और मैन्यूफैक्चरिंग के मोर्चे पर चुनौतियां बरकरार हैं। मोदी सरकार की पिछले एक साल की उपलब्धियों और चुनौतियों पर अमर उजाला के सुजय मेहदूदिया और शिशिर चौरसिया की वित्त मंत्री अरुण जेटली से बातचीत के प्रमुख अंश-

एक साल की प्रमुख उपलब्धि आप क्या मानते हैं?


साल भर पहले जब हमने कामकाज संभाला था, उस वक्त आर्थिक हालात प्रतिकूल थे। निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ था। आज विदेशी निवेशक भारत की तरफ आशा भरी नजरों से देख रहा है। अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत की साख बढ़ी है। भारत फिर दुनिया में ‘प्रीफर्ड इंवेस्टेमेंट डेस्टिनेशन बन कर उभरा है। अप्रैल 2015 में खुदरा महंगाई दर घटकर 4.87 फीसदी पर आ गई, जो बाजार के अनुमान से भी कम है। यह अप्रैल 2014 में 8.59 फीसदी थी। विदेशी मुद्रा भंडार 8 मई 2015 को 352 अरब डॉलर था, जो अब तक का सर्वाधिक है। चालू खाते का घाटा 2014-15 में 1.3 फीसदी से भी कम रहने की संभावना है। सरकार की नीतियों की बदौलत ही 2014-15 के अंत में राजकोषीय घाटा 5.01 लाख करोड़ रुपये रहा, जो इस वर्ष के संशोधित अनुमान का 98 फीसदी है।


सभी कार्य पूरे हो गए या कुछ शेष हैं?
मैं ऐसा नहीं कहता। कुछ चुनौतियां अब भी हैं। अभी तक निजी निवेश जोर नहीं पकड़ रहा है। समाज के अंतिम पायदान पर रहने वालों तक विकास का लाभ नहीं पहुंच पाया है। सरकार गांवों में उचित ढांचागत सुविधा विकसित नहीं कर पाई है। मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को फिर पटरी पर लाना है। हमें इन सब पर ध्यान देना है।


ग्रामीण इलाकों के लिए सरकार की रणनीति क्या रहेगी?
हमने प्रधानमंत्री जन धन योजना शुरू की है, जिसके तहत गांवों में बैंक खाते खोले गए। यही बैंक खाते सरकार के हथियार बनेंगे। हमने जन धन, आधार और मोबाइल नंबर (जैम) को जोड़कर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण का खाका खींचा है। इससे सब्सिडी सीधा खाते में जाएगी और उसकी सूचना तत्काल उनके मोबाइल फोन पर पहुंच जाएगी। इससे भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी।


विपक्ष का आरोप है आपका बजट कारोबारियों का है?
यह बात कोई कैसे कह सकता है। मैं कहता हूं कि यह किसानों और युवाओं का बजट है। हमने मिट्टी की उर्वरा और सिंचाई के साधन बढ़ाने के बजट में प्रावधान किए। हर किसान को मिट्टी का हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि उन्हें पता हो कि उनके खेत की उर्वरा शक्ति क्या है और खेत में क्या डालें कि पैदावार बढ़े। मेक इन इंडिया कार्यक्रम पर बल दिया जा रहा है, जब यह फलीभूत होगा तो युवाओं को ही रोजगार मिलेगा। हम ग्रामीण क्षेत्र में भी दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना चला रहे हैं ताकि वहां भी युवा हुनर सीख सकें।


काले धन पर क्या प्रगति हुई है?
सरकार बनते ही हमारा पहला निर्णय काले धन पर एसआईटी के गठन का रहा।हमने विदेशों में जमा काला धन वापस लाने के लिए संसद से अघोषित विदेशी आय एवं परिसंपत्ति विधेयक 2015 पारित कराया। हम स्विट्जरलैंड से भी जानकारी हासिल करने की कोशिश में हैं। कुछ और कदम उठाए जा रहे हैं जिससे देश में काले धन का पता लगाना आसान हो जाएगा। हमने एक लाख रुपये से अधिक की खरीद-बिक्री पर पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए हमारे प्रयास रंग लाने लगे हैं।


चालू वर्ष के लिए आर्थिक मोर्चों पर सरकार की क्या रणनीति रहेगी। जनता क्या उम्मीद कर सकती है?
आप हमारे 2015-16 के बजट को देखें तो पाएंगे कि यह गरीबों, युवाओं, किसानों और मध्यवर्ग का बजट है। सरकार का मानना है कि कारोबारियों और गरीबों के बीच विवाद नहीं होना चाहिए, बल्कि दोनों के बीच अन्योन्याश्रय संबंध होना चाहिए। गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएं चलाने के लिए धन की जरूरत होगी और सरकार की झोली तभी भरेगी जबकि कारोबार फूले-फले। हम उद्योग धंधे के लिए राह आसान करेंगे, ताकि यहां मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा मिले। इससे ज्यादा ये ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा, उनका जीवन स्तर सुधरेगा, उनकी क्रय क्षमता बढ़ेगी।


पिछले साल विनिवेश से 58,425 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया। क्या इस साल यह पूरा होगा?
आप कहते हैं कि वर्ष 2014-15 में हम लक्ष्य पूरा नहीं कर पाए, जबकि मैं कहता हूं कि उस साल रिकार्ड तोड़ राशि आई। पिछले साल हमने विनिवेश से 24,277 करोड़ जुटाए यह एक वर्ष में अब तक का जुटाया गया सर्वाधिक धन है। जनवरी में ही देखिए ना, सिर्फ कोल इंडिया के विनिवेश से हमने 22,558 करोड़ जुटाया। इस साल के लिए जो लक्ष्य तय किया गया है, वह भी पूरा होगा।







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